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Tuesday, 10 September 2019
उसकी आँखों के बो आंशु नहीं सोने देते गाँव मैं रोता हुआ जिसको छोड़ आया हूँ
लम्हे लम्हे को तेरी याद में चुराता था
दोस्त चिढ़ते थे सभी और जला करते थे,
दोस्त चिढ़ते थे सभी और जला करते थे
जब तेरे कहने से तितली पकडके लाता था
खाई थी जो भी कसम उनको तोड़ आया हूँ
अपने हाथों से बो रिश्ता मरोड़ आया हूँ
और उसकी आँखों के वो आंशु नहीं सोने देते,
उसकी आँखों के बो आंशु नहीं सोने देते
गाँव मैं रोता हुआ जिसको छोड़ आया हूँ
होकर खामोश जब भी रात ढलने लगती है
उसकी आहट भी मेरे साथ चलने लगती है
आये जब भी मेरी राहों मैं अँधेरा गम का
आये जब भी मेरी राहों मैं अँधेरा गम का
रौशनी बनके प्यार की वो जलने लगती है
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भरी महफ़िल में जब भी याद उसकी आती है रोकू कितना भी खुद को आँख भर ही जाती है
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